Monday, April 30, 2007

बेवफ़ा

कभी पास आ गये
कभी दूर हो गये
उन्होने एक बार भी मूड कर ना देखा हमे,
पर हम उन के लिए बेवफ़ा ज़रूर हो गये
क्या ग़लती हुई हम से हम पूछते रहे,
और वोह केहते रहे हम मजबूर हो गये
हम माँगते रहे दुआ उनकी खुशियों की,
वो हमे छोड़ किसी और की आँखों के नूर हो गये
वो सोचते रहे के खुश हैं मे
पर हम टूट कर अंदर तक चकना चूर हो गये
मुझे प्यार करने की मिली इतनी बड़ी सज़ा,
और वो हमे मार कर भी बेक़सूर हो गये .

2 comments:

Amar Singh said...

Hi Neeraj
Nice Brother aapne to Dil nikal kar rakh dia
very nice

Neeraj said...

thx brother