Thursday, August 23, 2007

दोस्ती क्या है

क्या ख़बर तुम को दोस्ती क्या है
ये रोशनी भी है अंधेरा भी है
ख़्वाहीसों से भरा जज़ीरा भी है
बहुत अनमोल एक हीरा भी है

दोस्ती यूँ तौ माया जाल भी है
इक हक़ीक़त भी है ख़याल भी है
कभी शाम तो कभी सुबह भी है
कभी ज़मीन कभी आसमान भी है

दोस्ती झूठ भी है सच भी है
दिल मैं रह जाए तो कसक भी है
कभी ये जीत कभी हार भी है
दोस्ती साज़ भी है संगीत भी है

शेर, नज़म ओर गीत भी है
वफ़ा क्या है वफ़ा भी दोस्ती ही है
दिल से निकली हैर दुआ भी दोस्ती ही है
बस इतना समझ ले तू प्यार की इंतहा भी दोस्ती ही है

3 comments:

Isht Deo Sankrityaayan said...

बढ़िया लिखा है.

हरिराम said...

पति पत्नी भी एक दूसरे से कुछ न कुछ छुपाते हैं। अक्सर कोई अपने माँ, बाप, भाई, बहन.. हर किसी से कुछ न कुछ छुपाता है। अन्तर के सारे राज़ तो सच्चे दोस्त को ही बताए जाते हैं। दोस्त वही है जिस पर इतना विश्वास और भरोसा हो।

Udan Tashtari said...

बढ़िया है भाई!! लिखते रहो.