हवा की तरह वो मुझे छू जाती है
पर नज़र क्यूं नही आती है
जब भी हाथ बदता हूँ छू लेने को
एक याद की तरह गुम हो जाती है
क्यूं रहती है एक अजनबी की तरह
वो मुझे क्यूं इतना तड़पाती है
क्या ख़बर नही उसे मेरे हाल की
या वो मुझे बस यूँही सताती है
Thursday, July 26, 2007
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1 comments:
अच्छा है...
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