कब तक अपने राज़ को छुपाओगे
एक दिन तो हक़ीकत बन कर सबके सामने आओगे
तुम कर लो हज़ार कोशिशे राज़ छुपाने की
अब हम भी अपने इंतजार की हद तक अब जाएँगे
हुस्न ऑर माशूमियत से भरी हैं तेरी तस्वीरें
पर क्या फ़ायदा एक दिन तो
हर तस्वीर का रंग उतर ही जाएगा
चाहे कोई कितनी भी वफा कर ले मोहब्बत मैं
एक दिन तो महबूब के हाथों ये दिल बिखर हे जाएगा.
हम तो कर चुके हर कोशिश तुछे पाने की
पर अब इस दिल से तेरा नाम मिट ही जाएगा.
Monday, December 3, 2007
कब तक अपने राज़ को छुपाओगे
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2 comments:
कब तक अपने राज़ को छुपाओगे
एक दिन तो हक़ीकत बन कर सबके सामने आओगे
आपने तो दिल की बात कह दी
आशीष
सुन्दर लिखा है पर गल्तियों को नज़रअन्दाज़ मत करो। जितनी कम अशुद्धियाँ होंगीं ,पढने में उतना रुचिकर लगेगा।
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