हर बार
बार बार
खा कर
धोखा ,भी
ना होश आया
हर बार ना
जाने हमने क्यों
हारते हुए पर
ही दांव लगाया
सोचा ,होगा साथ
मुड के देखेगा वो
पर आहट भी
ना हुई
और वो लाँघ सब
सीमायें बढ़ता ही
आया ...
और कर गया
तार तार मेरा स्वाभिमान
और मेरे हिस्से में फिर
इंतजार ही आया
Tuesday, April 19, 2011
Thursday, May 6, 2010
ग़म में हंसने वालो को कभी रुलाया नहीं जाता!
कहाँ रोज रोज मिलती है वजह यूँ इस तरह पास हमारे आने की,
कुछ देर और ठहरो कि आँखों ने इजाजत नहीं दी है अभी जाने की
क्या जरूरत है शर्म-ओ-हया को, लबों पर इस तरह पहरा बिठाने की,
ग़र आँखों की जुबां समझो तो बात नहीं कुछ और तुम्हें बताने की
कैद कर लेंगे इन आँखों में हम उनको जिन्हें आदत थी छुप जाने की,
आखिर कुछ तो सजा मिलनी ही चाहिए चुपचाप दिल में उतर आने की
तस्सवुर में खोई रहती थी ये आँखें, फुरसत कहाँ थी इन्हें छलक जाने की,
क्यों फिर अब भर आई हैं, जबसे खबर मिली है चाँद निकल आने की
तन्हाइयों में तो सुना करते थे हम आवाज़ें सिर्फ वक्त के करहाने की,
पंख से क्यों लग गये हैं उसको, आहट जब से हुई है उनके आने की
धड़कने खामोश हैं, साँसें थम गई हैं वजह क्या है जुबां के लड़खड़ाने की,
कुछ तो कहो इरादा-ए-कत्ल है या कि आदत है तुम्हें यूँ ही मुस्कुराने की
कुछ देर और ठहरो कि आँखों ने इजाजत नहीं दी है अभी जाने की
क्या जरूरत है शर्म-ओ-हया को, लबों पर इस तरह पहरा बिठाने की,
ग़र आँखों की जुबां समझो तो बात नहीं कुछ और तुम्हें बताने की
कैद कर लेंगे इन आँखों में हम उनको जिन्हें आदत थी छुप जाने की,
आखिर कुछ तो सजा मिलनी ही चाहिए चुपचाप दिल में उतर आने की
तस्सवुर में खोई रहती थी ये आँखें, फुरसत कहाँ थी इन्हें छलक जाने की,
क्यों फिर अब भर आई हैं, जबसे खबर मिली है चाँद निकल आने की
तन्हाइयों में तो सुना करते थे हम आवाज़ें सिर्फ वक्त के करहाने की,
पंख से क्यों लग गये हैं उसको, आहट जब से हुई है उनके आने की
धड़कने खामोश हैं, साँसें थम गई हैं वजह क्या है जुबां के लड़खड़ाने की,
कुछ तो कहो इरादा-ए-कत्ल है या कि आदत है तुम्हें यूँ ही मुस्कुराने की
Thursday, March 4, 2010
हर पल खुदा से यही मांगता हूँ
हर पल खुदा से यही मांगता हूँ ,
सदा यूँ ही दुल्हन की तरह सजती रहो !
ना गम की परछाइयाँ आये कभी ,
सदा यूँ ही हंसती रहो !!
मैंने तो जोड़ लिया है तुमसे
दिल का रिश्ता ,
सदा यूँ ही
मेरे दिल में बसती रहो !!!
अब ना जी पाऊंगा
कभी तुम्हारे बिन ,
सदा यूँ ही
मुझसे प्यार करती रहो !!!!
सदा यूँ ही दुल्हन की तरह सजती रहो !
ना गम की परछाइयाँ आये कभी ,
सदा यूँ ही हंसती रहो !!
मैंने तो जोड़ लिया है तुमसे
दिल का रिश्ता ,
सदा यूँ ही
मेरे दिल में बसती रहो !!!
अब ना जी पाऊंगा
कभी तुम्हारे बिन ,
सदा यूँ ही
मुझसे प्यार करती रहो !!!!
Friday, February 26, 2010
जब भी देखोगे मुझे इसी हाल में पाओगे,
जब भी देखोगे मुझे इसी हाल में पाओगे,
आँख में आँसू, लबों को हँसता हुआ पाओगे
तुम्हारा तो खैर यकीन है मुझे खुद से ज्यादा,
आँसू दिया है जब आज तो कल भी रुलाओगे
मेरा क्या है? एक अदना-सा आदमी ही तो हूँ
आखिर कब तक मुझे तुम याद रख पाओगे?
मुझे तो अपनी ख़ाक पर भी कोई हक़ नहीं,
हर उम्मीद है झूठी, क्यों कोई उम्मीद दिलाओगे?
आँख में आँसू, लबों को हँसता हुआ पाओगे
तुम्हारा तो खैर यकीन है मुझे खुद से ज्यादा,
आँसू दिया है जब आज तो कल भी रुलाओगे
मेरा क्या है? एक अदना-सा आदमी ही तो हूँ
आखिर कब तक मुझे तुम याद रख पाओगे?
मुझे तो अपनी ख़ाक पर भी कोई हक़ नहीं,
हर उम्मीद है झूठी, क्यों कोई उम्मीद दिलाओगे?
Friday, September 4, 2009
खामोश निगाहों का सपना तुम हो
खामोश निगाहों का सपना तुम हो,
जिसको भुला न सकूं, वो अपना तुम हो,
जिसकी हर बात, मेरी तन्हाईयों को छू ले,
सच ऐ ख्वाब, वो तुम हो,
वो तुम हो, वो तुम हो।
जिसकी धङकन की आवाज़,
सिर्फ मैं सुनूं ,दिन और रात,
जिसके आने की राह तकें,
ये आंखे बार-बार,
जिसकी खुशबू का पता,
बहारें मुझको दें जांए,
सच ऐ ख्वाब वो तुम हो,
वो तुम हो वो तुम हो।
जिसका अफसाना मेरे हयात के,
पैमाने में भरा हो,
जिसको पी कर मेरा गम भी,
दीवाना बन गया हो,
मेरे माज़ी के हर पन्ने पे,
लिखी जिसकी दास्तां,
सच ऐ ख्वाब, वो तुम हो,
वो तुम हो वो तुम हो।
जिसको भुला न सकूं, वो अपना तुम हो,
जिसकी हर बात, मेरी तन्हाईयों को छू ले,
सच ऐ ख्वाब, वो तुम हो,
वो तुम हो, वो तुम हो।
जिसकी धङकन की आवाज़,
सिर्फ मैं सुनूं ,दिन और रात,
जिसके आने की राह तकें,
ये आंखे बार-बार,
जिसकी खुशबू का पता,
बहारें मुझको दें जांए,
सच ऐ ख्वाब वो तुम हो,
वो तुम हो वो तुम हो।
जिसका अफसाना मेरे हयात के,
पैमाने में भरा हो,
जिसको पी कर मेरा गम भी,
दीवाना बन गया हो,
मेरे माज़ी के हर पन्ने पे,
लिखी जिसकी दास्तां,
सच ऐ ख्वाब, वो तुम हो,
वो तुम हो वो तुम हो।
Friday, July 10, 2009
दिल में छुपा रखा है तुझे याद बना के
दिल में छुपा रखा है तुझे याद बना के
कभी सांसों का हौसला कभी फरियाद बना के
हर एक कोने को रौशन किया तस्वीर से तेरी
तेरी हर बात ने छोडा मुझे बर्बाद बना के
आसमां ना गुमां कर ले रात की चांदनी पे कही
तभी तो ज़मीं पे उतारा गया है तुझे चाँद बना के
मै नए साल में क्या पेश करू तोहफतन तुझको
हर धड़कन को भेजा है मुबारकबाद बना के
एक ख्वाब सच हो वरना इन बातों का क्या है
कल ख्वाब में देखा खुद को तेरा नौशाद बना के
यह क्या रंग ज़िन्दगी का दिखाते हो 'शाहंशाह'
तुम खुद ही रूठ गए सभी को शाद बना के
कभी सांसों का हौसला कभी फरियाद बना के
हर एक कोने को रौशन किया तस्वीर से तेरी
तेरी हर बात ने छोडा मुझे बर्बाद बना के
आसमां ना गुमां कर ले रात की चांदनी पे कही
तभी तो ज़मीं पे उतारा गया है तुझे चाँद बना के
मै नए साल में क्या पेश करू तोहफतन तुझको
हर धड़कन को भेजा है मुबारकबाद बना के
एक ख्वाब सच हो वरना इन बातों का क्या है
कल ख्वाब में देखा खुद को तेरा नौशाद बना के
यह क्या रंग ज़िन्दगी का दिखाते हो 'शाहंशाह'
तुम खुद ही रूठ गए सभी को शाद बना के
Thursday, June 18, 2009
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .
एक दोस्त है कच्चा पक्का सा ,
एक झू�¤ है आधा सच्चा सा .
जज़्बात को ढके एक पर्दा बस ,
एक बहाना है अच्छा अच्छा सा .
जीवन का एक ऐसा साथी है ,
जो दूर हो के पास नहीं .
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .
हवा का एक सुहाना झोंका है ,
कभी नाज़ुक तो कभी तुफानो सा .
शक्ल देख कर जो नज़रें झुका ले ,
कभी अपना तो कभी बेगानों सा .
जिंदगी का एक ऐसा हमसफ़र ,
जो समंदर है , पर दिल को प्यास नहीं .
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .
एक साथी जो अनकही कुछ बातें कह जाता है ,
यादों में जिसका एक धुंधला चेहरा रह जाता है .
यूँ तो उसके न होने का कुछ गम नहीं ,
पर कभी - कभी आँखों से आंसू बन के बह जाता है .
यूँ रहता तो मेरे तसव्वुर में है ,
पर इन आँखों को उसकी तलाश नहीं .
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .
एक दोस्त है कच्चा पक्का सा ,
एक झू�¤ है आधा सच्चा सा .
जज़्बात को ढके एक पर्दा बस ,
एक बहाना है अच्छा अच्छा सा .
जीवन का एक ऐसा साथी है ,
जो दूर हो के पास नहीं .
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .
हवा का एक सुहाना झोंका है ,
कभी नाज़ुक तो कभी तुफानो सा .
शक्ल देख कर जो नज़रें झुका ले ,
कभी अपना तो कभी बेगानों सा .
जिंदगी का एक ऐसा हमसफ़र ,
जो समंदर है , पर दिल को प्यास नहीं .
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .
एक साथी जो अनकही कुछ बातें कह जाता है ,
यादों में जिसका एक धुंधला चेहरा रह जाता है .
यूँ तो उसके न होने का कुछ गम नहीं ,
पर कभी - कभी आँखों से आंसू बन के बह जाता है .
यूँ रहता तो मेरे तसव्वुर में है ,
पर इन आँखों को उसकी तलाश नहीं .
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